2024, Vol. 6, Issue 1, Part A
प्रेमचंद की कहानियों में दलित-विमर्श
Author(s): संगीता कुमारी
Abstract: प्रेमचंद जी अपने छोाटेसे लमही गॉंव के माध्यम से उन्होंने भारत की पीड़ित एवं दलित जन की पीड़ा को धड़कनों को सुना था । उनके सामर्थ्य, सीमा एवं सार्थकता को परखा था । फलत: दलित सर्वहारा वर्ग की आत्मा उनके वाड्मय में साकार हो उठी । कलम के इसे सिपाही में सामान्य जन के लिए असीम सहानुभूति थी जो उनके साहित्य में मुखरित हो उठी है ।
DOI: 10.33545/27068919.2024.v6.i1a.1642Pages: 100-102 | Views: 903 | Downloads: 305Download Full Article: Click Here