International Journal of Advanced Academic Studies
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2023, Vol. 5, Issue 8, Part A

भक्तिकाल के कवि रामानंद का सांगितिक योगदान


Author(s): Vaishali Sharma Mishra and Dr. Sudha Dixit

Abstract: आचार्यरामचन्द्रशुक्लनेहिन्दीसाहित्यकेइतिहासकोचारभागोंमेंविभाजितकियाहै: द्रव्यगाथाकाल, भक्तिकाल, रीतिकालऔरआधुनिककाल।संवत 1050 से 1365 तकवीरगाथाकालकेअंतर्गतआताहै, 1365 से 1700 तकभक्तिकालकेअंतर्गत, 1700 से 1900 तकरीतिकालकेअंतर्गतऔर 1900 सेआजतककासमयभक्तिकाव्यकेसमकालीनकालकेअंतर्गतआताहै।भक्तिकालकोहिंदीसाहित्यकाचरमकालमानाजाताहै।येचारमहानकवि- सूर, तुलसी, कबीरऔरजायसी- भक्तिकालमेंरचेगये।हिंदीसाहित्यकेसूर्यऔरचंद्रमाकाजन्मइसीयुगमेंहुआ।हालाँकिइसपूरेसमयमेंतीनधाराएँचलरहीथीं - प्रेम, ज्ञानऔरशुद्धभक्तिकामार्ग - केवलभक्तिकाआंतरिकस्रोतहीप्रवाहितहोरहाथा, यहीकारणहैकिइससमयअवधिकोभक्तिकेकालकेरूपमेंजानाजाताहै।भक्तिभीप्रेमकारूपधारणकरलेतीहै।भक्तिकाव्यकीदोधाराएँथींएकसगुणधाराऔरदूसरीधारा।निर्गुणधाराकेसंस्थापकोंद्वारानिराकारईश्वरकीपूजाकोप्राथमिकतादीगई।ज्ञानऔरप्रेमकेमार्गनिर्गुणधारासेनिर्मितहुए।मुहम्मदजायसीप्रेममार्गीशाखाकेगुरुथे, जबकिकबीरज्ञानमार्गीशाखाकेआदिकविथे।

DOI: 10.33545/27068919.2023.v5.i8a.1028

Pages: 28-30 | Views: 231 | Downloads: 67

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How to cite this article:
Vaishali Sharma Mishra, Dr. Sudha Dixit. भक्तिकाल के कवि रामानंद का सांगितिक योगदान. Int J Adv Acad Stud 2023;5(8):28-30. DOI: 10.33545/27068919.2023.v5.i8a.1028
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